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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
विवेकानन्द की संवाद संचार कला : एक अध्ययन
Authors
अमिता
Abstract
संचार मानव की नैसर्गिक आवश्यकता है और संचार मानव का स्वभाव भी। संवाद संचार की प्रक्रिया का एक प्रमुख अंग है। संवाद के ही माध्यम से व्यक्ति अपने भाव, विचार, सोच को किसी दूसरे व्यक्ति या समूह तक संचारित करता है। भारत में संवाद संचार की परम्परा बहुत ही पुरानी है, जो वैदिक काल से अनवरत चली आ रही है। इस कड़ी में आधुनिक भारत के इतिहास में स्वामी विवेकानन्द एक गौरवपुन्ज के समान है। सर्वप्रथम विवेकानन्द ने ही भारत के आध्यात्मिक गौरव की पताका को विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक मंच पर प्रत्यारोपित किया। उन्होनें 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में भारतीय गौरव को प्रतिष्ठित ही नहीं, वरन् प्रमाणित भी किया। धर्म संसद मूक एवं अवाक होकर उनके द्वारा प्रसारित सन्देश को ग्रहण कर रही थी। यह एक प्रकार से उनके संवाद कला या प्रभावी संचार का ही प्रतिफल था। प्रस्तुत अध्ययन में विवेकानन्द के विविध भाषणों का संवाद संचार के पंच मापदण्डों के आधार पर मूल्यांकन किया जावेगा। इस अध्ययन के लिये स्वामीजी के विभिन्न ग्रन्थों में प्रकाशित 9 संदेशों का चयन सुविधाजनक निदर्शन पर किया जाएगा।
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Pages:703-706
How to cite this article:
अमिता "विवेकानन्द की संवाद संचार कला : एक अध्ययन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 703-706
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