ARCHIVES
VOL. 6, ISSUE 1 (2021)
कोरोना काल और साहित्य में संवेदना का दौर
Authors
डॉ. हसीना बानो
Abstract
कोरोना के इस संक्रमण काल में हमारे जीवन और समाज में व्यापक परिवर्तन हुआ है। कोरोना संक्रमण काल का प्रभाव अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था, देश के सभी छोटे-बडे़ व्यापारियों, गरीब श्रमिकों, प्रत्येक वर्ग पर दिखाई पड़ता है। कोरोना संक्रमण काल में मानव जीवन का प्रत्येक क्षेत्र घातक रूप से मानसिक और शारीरिक प्रभाव से ग्रसित हुआ है। जहाँ एक तरफ प्रगति की ओर हमारा देश बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर इस कोरोना काल के दौर में, जो परिवर्तन हो रहा है, उससे हमारी गति और प्रगति स्थिर हो गयी है। कोरोना काल का यह समय असाधारण मानवीय संकट का समय बन गया है। कोरोना काल में सामाजिक जीवन, शैक्षिक वातावरण, अर्थव्यवस्था इतनी प्रभावित हो रही है कि स्वयं को ऐसे में संयोजित करना सरल नहीं है। लोगों में घबराहट, बेचैनी, भय जीवन की श्रृंखला का तोड़-फोड़ रहें हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कोरोना ने इतनी विषम समस्या खड़ी कर दी है जो बच्चों के बुनियादी शिक्षा को अधिक प्रभावित कर रही है। उच्च शिक्षा में यह बदलाव, यह परिवर्तन जहाँ आगे की तरफ ले जाती है, डिजिटल शिक्षा के नये विकल्प विकसित हो रहे है। वहीं बुनियादी शिक्षा, जहाँ तक मेरा विचार है थोड़ा कमजोर पड़ रहा है। ऐसे में हमें अपने ज्ञान और साहित्य को सक्षम हथियार के रूप में विकसित करना होगा। साहित्य में संवेदना की अभिव्यक्ति ही हमें प्रेरणा, भाव और भाषा से प्रेरित कर सकती है।
Download
Pages:23-25
How to cite this article:
डॉ. हसीना बानो "कोरोना काल और साहित्य में संवेदना का दौर". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 6, Issue 1, 2021, Pages 23-25
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.
