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VOL. 6, ISSUE 3 (2021)
राजस्थान में आवास की कमी और वित्तीय संस्थाओं द्वारा आवासीय ऋण का वितरण
Authors
प्रेम परिहार
Abstract
आवास एक उपभोक्ता उत्पाद भी है और पूँजी उत्पाद भी। यह एक ऐसा उत्पाद है जो जीवन स्तर को बेहतर बनाता है। आवासहीन गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्तियों को पक्के आवास उपलब्ध करवाने, झुग्गी-झोपड़ी मुक्त करने, कच्ची बस्तियों में मूलभूत जीवन उपयोगी सुविधाएँ उपलब्ध करवाने, नियमन अयोग्य कच्ची बस्तियों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने और सस्ते मकान उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत् है। वर्ष 2018 में कुल आवास की आवश्यकता 4,83,775 इकाईयों की और इस दौरान आवास वित्त की आवश्यकता 28,78,459 लाख रूपए का अनुमान लगाया गया था, इस के आधार पर वर्ष 2020-21 में 10,76,549 लाख रूपए, वर्ष 2021-22 में 14,17,566 लाख रूपए और वर्ष 2022-23 में 15,32,504 लाख रूपए का अनुमान लगाया गया है। जबकि 31 मार्च 2020 तक 4,99,734 किफायती आवास इकाईयों की माँग रही जिसे वर्ष 2022-23 में प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया। वर्ष 2014 में बैंकों ने 10,710.28 करोड़ के आवासीय ऋण प्रदान किए जो कि वर्ष 2019 में बढ़कर 27,240.7 करोड़ रूपए हो गया है। आवास वित्त कंपनियों के ऋणों में शहरी और ग्रामीण दोनों ही स्तर पर वृद्धि हो रही है। वर्ष 2014 में आवास वित्त कंपनियों ने 3487.22 करोड़ के आवासीय ऋण प्रदान किए जो कि वर्ष 2020 में बढ़कर 8758 करोड़ रूपए हो गया है।
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Pages:08-11
How to cite this article:
प्रेम परिहार "राजस्थान में आवास की कमी और वित्तीय संस्थाओं द्वारा आवासीय ऋण का वितरण ". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 6, Issue 3, 2021, Pages 08-11
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