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VOL. 6, ISSUE 4 (2021)
नवजागरण की अवधारणा और निराला का काव्य
Authors
डॉ. संतोष रामचंद्र आडे
Abstract
पूर्व साहित्य राज दरबारों में ही सिर झुका रहा था, किन्तु अब साहित्यकार समाज से जुडकर समाज में फैले आडम्बर, रूढ़ि, वर्ण-वर्ग भेद, कुरीति, सती प्रथा, बाल-विवाह, आदि का विरोध करने लगे। विधवा विवाह का समर्थन और सामंती व्यवसथा,उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद का विरोध प्रखर हुआ। देश में स्वराज्य की इच्छा जगी। व्यापक स्तर पर जन-आंदोलन शुुरू हुए । लोग तार्किक होने लगें और ऑंख बंद करके किसी पाखण्ड को मानने की जगह उस पर तर्कपूर्ण विचार करने लगे। भारत में यह चेतना हर जगह, हर समाज में अलग-अलग वक्त पर आयी किन्तु सबका उदेश्य सुधार ही लाना था। आगे चलकर जनता में भाईचारे की भावना को भी साहित्य द्वारा सभी में विकसित करने की कोशिश भी की गई। इस भावना को विकसित करने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान द्विवेदी युगीन कवियों का रहा है।
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Pages:1-4
How to cite this article:
डॉ. संतोष रामचंद्र आडे "नवजागरण की अवधारणा और निराला का काव्य ". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 6, Issue 4, 2021, Pages 1-4
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