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VOL. 7, ISSUE 2 (2022)
भारत में सामाजिक और धार्मिक सुधार ही क्यों ? एक विवेचनात्मक अध्ययन
Authors
डॉ. अनुराग पांडेय
Abstract
भारत में सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन 19 वीं शताब्दी में प्रारम्भ होता है। मुख्य रूप से ये आंदोलन दो मुद्दों पर केंद्रित रहता है, पहला ष्महिला सुधार और महिलाओं के समान अधिकार एवं दूसरा जाति प्रथा का उन्मूलन और छुआछूत प्रथा का अंत। अतः मुख्यतः समाज और धर्म सुधार आंदोलन लैंगिक एवं धार्मिक भेदभाव को खत्म कर, समानता के आधार पर एक समतामूलक समाज की स्थापना पर जोर दे रहा था। यह अध्याय इस बिंदु पर प्रकाश डालता हैं के भारत में सामजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन हुए ही क्यों? क्यों भारत सिर्फ 1857 की एकमात्र क्रांति ही देखता है और भारतियों ने दुबारा 1857 की तर्ज पर गलतियों से सनक लेते हुए आखिर क्यों सशस्त्र विद्रोह या युद्ध नहीं किया? प्रस्तुत लेख इन्ही कुछ बिंदुओं पर प्रकाश डालने का प्रयास है।
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Pages:47-49
How to cite this article:
डॉ. अनुराग पांडेय "भारत में सामाजिक और धार्मिक सुधार ही क्यों ? एक विवेचनात्मक अध्ययन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 7, Issue 2, 2022, Pages 47-49
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