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VOL. 8, ISSUE 1 (2023)
रामायण महाकाव्य में संगीत कला
Authors
डॉ. शम्पा चौधरी
Abstract
साहित्य जगत के साथ-साथ संगीत जगत में भी रामायण को विशेष स्थान प्राप्त है क्योकि पाठ्य होने के साथ-साथ यह छंदोबद्ध तथा गेय भी है। इसका प्रस्तुतिकरण पठन और गायन दोनो प्रकार से होने के कारण पूरे भारत में ही नहीं अपितु समस्त विश्व में यह अपना एक विशेष स्थान रखता है। यह महाकाव्य भक्ति, ज्ञान, राजनीति, आदर्शवाद का एक अनूठा उदाहरण है, जिसका प्रचार-प्रसार जन-जन तक हो चुका है। धनी-निर्धन, बाल-वृद्ध, शिक्षित-अशिक्षित सभी वर्गों के लोग इसे समझ सकते हैं और अपने जीवन की दिनचर्या में इसका अनुभव कर सकते हैं। जीवन के हर पहलू और हर संदर्भ में यह काव्य किसी न किसी रुप में प्रकाश डालता है। रामायण से हमें मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श चरित्र को निकट से जानने का अवसर प्राप्त होता है।
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Pages:55-58
How to cite this article:
डॉ. शम्पा चौधरी "रामायण महाकाव्य में संगीत कला". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 8, Issue 1, 2023, Pages 55-58
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