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VOL. 8, ISSUE 2 (2023)
स्वामी दयानन्द सरस्वती की शैक्षिक विचारधारा
Authors
कौशल कुमार
Abstract
स्वामी दयानंद सरस्वती वेद के तत्त्व द्रष्ता, वैदिक दर्शन के विद्वान, ईश्वरवादी होते हुए भी मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते थे। भारतीय शिक्षा को पुनः भारतीय बनाने का विशेष प्रयत्न किया। इन्होंने शिक्षा को ज्ञान और ज्ञान प्राप्ति के साधन, दो रूपों में स्वीकार किया है। मनुष्य जीवन का अंतिम उद्देश्य मुक्ति है एवं कर्म भोग से छुटकारा पाना है। इन्होंने शिक्षा के पाँच उद्देश्य यथा शारीरिक विकास, मानसिक विकास, यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति, समाज सुधार की शक्ति का विकास, सद् ज्ञान की प्राप्ति और सद् गुणों का विकास माना। उन्होंने बच्चे के गर्भ काल से लेकर पच्चीस वर्ष की आयु तक की शिक्षा की पाठ्यचर्या निश्चित की है। उनके अनुसार स्वाध्याय, उपदेश, व्याख्यान और वाद-विवाद प्रमुख शिक्षण विधियाँ है।
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Pages:173-175
How to cite this article:
कौशल कुमार "स्वामी दयानन्द सरस्वती की शैक्षिक विचारधारा". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 8, Issue 2, 2023, Pages 173-175
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