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VOL. 9, ISSUE 3 (2024)
काफल-औषधीय गुणों से भरपूर एक दुर्लभ पहाड़ी फल
Authors
किरण नेगी, गज़ाला जावेद
Abstract
काफल (वैज्ञानिक नामः माइरिका एसकूलेंटा) मिरिकेसी कुल का एक सदाबहार वृक्ष है। इसे अंग्रेजी में बेय बेरी या बॉक्स मिरतल, हिन्दी में कायफल, संस्कृत में कटफल, सोमवल्क, गुजराती में कारीफल, पंजाबी में कहेला और उर्दू में काईफल के नाम से जाना जाता है। यह भारत नेपाल, भूटान और चीन के शीतोषण कटिबन्ध क्षेत्र में समुद्रतल से लगभग 3000 से 5000 फीट की ऊँचाई पर पाया जाता है। इस वृक्ष के सभी भाग जैसे फल, फूल, बीज, तना, छाल और पतियों में शरीर के विभिन्न रोगों को दूर करने के प्राकृतिक औषधीय गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। अपने एंटी इन्फ्लैमटोरी, एंटी हेल्मेनतिक, एंटी माईक्रोबियल, एंटी आक्सिडन्ट आदि गुणों के कारण ही प्राचीन काल से ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसका उपयोग खांसी, पुरानी ब्रांकाइटिस, अल्सर, अनीमिया, दस्त, कान, नाक दर्द जैसे रोगों के उपचार में किया जाता है। प्रस्तुत पेपर में काफल के विषय में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई है।
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Pages:28-30
How to cite this article:
किरण नेगी, गज़ाला जावेद "काफल-औषधीय गुणों से भरपूर एक दुर्लभ पहाड़ी फल". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 9, Issue 3, 2024, Pages 28-30
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