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VOL. 9, ISSUE 4 (2024)
अंबेडकर की सामाजिक न्याय की अवधारणा
Authors
डॉ. अमिता मीना
Abstract
डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय सामाजिक एवं राजनीतिक चिंतन के ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने सामाजिक न्याय की अवधारणा को एक नई दिशा प्रदान की। उनके अनुसार सामाजिक न्याय केवल कानून के समक्ष समानता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर, गरिमा और सम्मान प्रदान करने की प्रक्रिया है । अंबेडकर ने भारतीय समाज में व्याप्त जाति-व्यवस्था, छुआछूत और असमानता को सामाजिक अन्याय का मूल कारण माना। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब तक सामाजिक ढाँचा समानता पर आधारित नहीं होगा, तब तक लोकतंत्र केवल एक औपचारिक प्रणाली बना रहेगा ।
उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को सामाजिक न्याय का आधार माना, जो कि एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैं । यह शोध-लेख अंबेडकर की सामाजिक न्याय की अवधारणा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है और इसकी समकालीन प्रासंगिकता को स्पष्ट करता है।
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Pages:37-38
How to cite this article:
डॉ. अमिता मीना "अंबेडकर की सामाजिक न्याय की अवधारणा". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 9, Issue 4, 2024, Pages 37-38
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