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VOL. 9, ISSUE 4 (2024)
महर्षि पतंजलि एवं महर्षि अरविन्द के योग दर्शन में निहित शैक्षिक विचार
Authors
मंजुला पचौरी, डा. विभा चौहान
Abstract
आज शिक्षा का जो रूप हमें दिखायी देता है, उसका अपना एक बहुत विस्तृत इतिहास है। भारतभूमि में अनेकों ऋषि व महापुरूषों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने विचारों एवं अपनी कृतियों के द्वारा इस देश को सत्य अहिंसा व विकास का मार्ग दिखाया है। योग शिक्षा दर्शन से सम्बन्धित समस्त उपायों का उद्गम स्थल योग शिक्षा शास्त्रियों के विचार ही हैं। जिस प्रकार किसी वृक्ष की शाखायें तथा उप शाखायें उसके तने से निःसृत होकर आकाश में छा जाती हैं। इसी प्रकार दार्शनिक पृष्ठ भूमि से भी शिक्षा के अनेक अंग पुण्यित एवं पल्लवित होते हैं। अतीत का अवलोकन करने से यह परिलक्षित होता है कि योग शिक्षा जगत में अनेक धाराओं का आविर्भाव हुआ है और कालान्तर में आने वाली नवीन धारा में समाहित होकर दर्शनों, विचारों तथा आन्दोलनों का उन्होंने एक समाहार रूप प्रस्तुत किया है। इसके मूल में योग शिक्षा मर्मज्ञों का अमूल्य योगदान है।
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Pages:15-17
How to cite this article:
मंजुला पचौरी, डा. विभा चौहान "महर्षि पतंजलि एवं महर्षि अरविन्द के योग दर्शन में निहित शैक्षिक विचार". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 9, Issue 4, 2024, Pages 15-17
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