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VOL. 10, ISSUE 1 (2025)
मजदुरों की सामाजिक-विधिक प्रस्थिति एवं श्रमिक विधियों के क्रियान्वयन में बाधक तत्वः भारत के परिपेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
डॉ. खुशबू पंवार
Abstract
बंधुआ मजदूर के लिये जो भी सरकार द्वारा प्रावधान सुरक्षोपाय किये जाने के बावजूद भी विधि व्यवस्था, कानून लागू करने वाली एजेन्सिया, सामाजिक परिवेष, आर्थिक मजदूरी, अषिक्षा इत्यादि के कारण बंधुआ मजदूरों की समस्या का पूरी तरह से निवारण अभी तक नहीं हो पाया है। बंधुआ मजदूरांे को मुक्त किये जाने के पष्चात् उनके पुर्नवास की उचित व्यवस्था नहीं होने तथा उनको समाज की मुख्य धारा में षामिल करने में विफल रहने पर बंधुआ मजदूर वापस अपनी पूरानी बंधक प्रथा में चले जाते है और इसे अपना भाग्य समझ लेते है। बंधुआ मजदूरों की सामाजिक स्थिति में बाधक तत्व कुछ इस प्रकार है जैसेः- जागरूकता का अभाव, सुविधाओं का अभाव, सरकार से सहायता की कमी, साहुकारों पर कमजौर वर्गो के सामाजिक और आर्थिक निर्भरता, प्रषासनिक और राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी, बंधुआ मजदूरों के लिए बने ससंाधनों का अनुचित उपयोग, प्रषासनिक निष्क्रियता के कारण पुर्नवास के कार्यक्रमों मे बांधा बंधुआ मजदूरों की बेहतरी के लिये काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों और स्वयंसेवी संगठनों का बोझ अधिक होना। बंधुआ मजदूरों की रोकथाम के लिये बने दण्डात्मक प्रावधानों के गैर प्रवर्तन, और बंधुआ मजदूरों की सामाजिक स्थिति में सुधार किये बिना कानूनी व सरकारी प्रयासों का लाभ उन तक नहीं पहुँच पायेगा। इसलिये उक्त वर्णित बाधक तत्वों के निराकरण का प्रयास किया जाये और इन पर विषेष योजना बनाकर समयबद्ध तरीके से कार्यवाही की जाये ताकि इन बंधुआ मजदूरों की सामाजिक प्रथा को जड़ से उखाड़ कर फेंका जा सकें।
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Pages:3-4
How to cite this article:
डॉ. खुशबू पंवार "मजदुरों की सामाजिक-विधिक प्रस्थिति एवं श्रमिक विधियों के क्रियान्वयन में बाधक तत्वः भारत के परिपेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 1, 2025, Pages 3-4
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