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VOL. 10, ISSUE 2 (2025)
चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन पर इसका प्रभाव
Authors
श्वेताराज, डॉ. नलिन विलोचन
Abstract
चंपारण सत्याग्रह, जिसे चंपारण आंदोलन के रूप में भी जाना जाता है, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक ऐतिहासिक घटना थी। यह 1917 में बिहार के चंपारण जिले में हुआ था और महात्मा गांधी द्वारा भारतीय धरती पर शुरू किया गया पहला सविनय अवज्ञा आंदोलन था। इस सत्याग्रह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 20वीं सदी की शुरुआत में देखी जा सकती है जब भारत अभी भी ब्रिटिश शासन के अधीन था। चंपारण के किसान अपने ब्रिटिश जमींदारों द्वारा लगाए गए दमनकारी नील की खेती प्रणाली के तहत पीड़ित थे। इसमें खाद्य फसलों के बजाय नील की फसलों की जबरन खेती शामिल थी, जिससे स्थानीय किसानों में व्यापक गरीबी और शोषण हुआ। महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में अपने सफल अभियानों के माध्यम से खुद को पहले ही एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित कर लिया था। जब वे भारत पहुंचे, तो राज कुमार शुक्ला नामक एक स्थानीय किसान ने उनसे इन शिकायतों को दूर करने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने में मदद मांगी। इसके बाद गांधी ने स्थानीय लोगों के साथ कई बैठकें कीं और उनके सामने आने वाले मुद्दों पर व्यापक शोध किया। उन्होंने पाया कि न केवल उन्हें नील की खेती करने के लिए मजबूर किया जा रहा था, बल्कि उनके जमींदारों द्वारा विभिन्न प्रकार के दुर्व्यवहार और हिंसा का भी सामना करना पड़ रहा था।
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Pages:18-23
How to cite this article:
श्वेताराज, डॉ. नलिन विलोचन "चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन पर इसका प्रभाव". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 2, 2025, Pages 18-23
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