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VOL. 10, ISSUE 2 (2025)
भारत के संविधान निर्माण में महिलाओं की भूमिका
Authors
पी. राजरत्नम
Abstract
भारतीय संविधान का निर्माण एक ऐतिहासिक और बहुस्तरीय प्रक्रिया थी, जिसमें देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक भविष्य की नींव रखी गई। यद्यपि इस प्रक्रिया में पुरुष नेताओं की भूमिका को व्यापक रूप से रेखांकित किया गया है, महिलाओं के योगदान को अपेक्षाकृत कम स्थान मिला है। प्रस्तुत शोध आलेख में संविधान सभा की 15 महिला सदस्यों के योगदान का विश्लेषण किया गया है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के संविधान को अधिक समावेशी, न्यायपूर्ण और समानतामूलक बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। हंसा मेहता, दुर्गा बाई देशमुख, राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी आदि महिलाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, लिंग-समानता, और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर प्रभावशाली दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। इन महिलाओं ने न केवल महिलाओं के अधिकारों की बात की, बल्कि राष्ट्रीय और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। यह आलेख उनके विचारों, योगदानों और ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए यह सिद्ध करता है कि भारतीय संविधान निर्माण एक समावेशी प्रक्रिया थी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण रही जितनी कि पुरुषों की। यह शोध नारी सशक्तिकरण और समतामूलक समाज की दिशा में एक आवश्यक ऐतिहासिक पुनर्पाठ है।
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Pages:42-45
How to cite this article:
पी. राजरत्नम "भारत के संविधान निर्माण में महिलाओं की भूमिका". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 2, 2025, Pages 42-45
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