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VOL. 11, ISSUE 2 (2026)
आधुनिक हिंदी कविता में पर्यावरण चेतना
Authors
प्रभा टेटे
Abstract
पर्यावरण वर्तमान समय की सबसे गंभीर वैश्विक समस्याओं में से एक है। औद्योगीकरण, नगरीकरण, जनसंख्या वृद्धि तथा प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के कारण पर्यावरणीय संतुलन निरंतर प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में साहित्य, विशेष रूप से कविता, पर्यावरणीय चेतना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रस्तुत शोध-पत्र “आधुनिक हिंदी कविता में पर्यावरण चेतना” का उद्देश्य आधुनिक हिंदी कवियों की रचनाओं में निहित पर्यावरणीय संवेदनाओं, चिंताओं तथा संरक्षण संबंधी दृष्टिकोण का अध्ययन करना है। शोध में सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, नागार्जुन, केदारनाथ सिंह तथा भवानी प्रसाद मिश्र जैसे प्रमुख कवियों की काव्य रचनाओं का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आधुनिक हिंदी कविता में प्रकृति केवल सौंदर्य के उपादान के रूप में नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और मानव अस्तित्व के आधार के रूप में प्रस्तुत हुई है। कवियों ने वनों की कटाई, जल एवं वायु प्रदूषण, जैव विविधता के ह्रास तथा प्रकृति के बढ़ते दोहन जैसी समस्याओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। साथ ही उन्होंने मानव और प्रकृति के मध्य संतुलित संबंध स्थापित करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामाजिक जागरूकता विकसित करने का संदेश दिया है। निष्कर्षतः आधुनिक हिंदी कविता पर्यावरणीय चेतना के विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरण का एक प्रभावी माध्यम सिद्ध होती है।
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Pages:92-97
How to cite this article:
प्रभा टेटे "आधुनिक हिंदी कविता में पर्यावरण चेतना". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 11, Issue 2, 2026, Pages 92-97
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