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VOL. 7, ISSUE 1 (2022)
भारतीय संगीत शिक्षा प्रणालीः विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
डा. शम्पा चौधरी
Abstract
प्राचीन काल में, भारतीय संगीत शिक्षा प्रणाली गुरु के प्रति समर्पण पर अधिक आधारित थी। धीरे-धीरे मौखिक ज्ञान को उसके संरक्षण के लिए लिखित रूप में बदल दिया गया। चूँकि संगीत को दुनिया के हर कोने में रहने वाले लोगों द्वारा सार्थक और उपयोगी बनाया जाता है, इसलिए सभी प्रकार के संगीत को संगीत के जानकार अथवा निर्माता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सीखा और प्रसारित किया जाता है। जो लोग वास्तव में संगीत के लिए प्रेरित होते हैं, वे अक्सर दूसरों को जानने और इसे आगे बढ़ाने के लिए, इसे साझा करने के लिए समर्पित होते हैं। ‘‘ये अत्यधिक प्रेरित संगीत निर्माता शिक्षण के कार्य में लगे हुए एवं परिसर पाए जाते हैं, वे संगीत शिक्षक हैं’’। सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ एवं परिसर छात्रों की संगीत अध्ययन शुरू करने और जारी रखने की इच्छा के लिए जिम्मेदार है, साथ ही संगीत के अवसरों की प्रकृति और परिस्थितियों को भी शामिल करता है। संगीत शिक्षक का अपना संगीत ज्ञान और कौशल, साथ ही शिक्षक की व्यक्तित्व विशेषताएँ जिनमें उत्साह, गर्मजोशी, धैर्य, चातुर्य, विश्वास, अनुकूलनशीलता और सकारात्मक प्रोत्साहन शामिल हैं, छात्रों के सीखने की इच्छा के संभावित कारण हैं। प्रस्तुत लेख के माध्यम से भारतीय संगीत शिक्षा पर प्रकाश डाला गया है तथा वर्तमान समय में संगीत शिक्षा प्रणाली के समक्ष आ रही चुनौतियों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है।
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Pages:64-66
How to cite this article:
डा. शम्पा चौधरी "भारतीय संगीत शिक्षा प्रणालीः विश्लेषणात्मक अध्ययन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 7, Issue 1, 2022, Pages 64-66
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