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VOL. 9, ISSUE 4 (2024)
श्रीमद्भागवद्गीता में ज्ञानयोग का स्वरूप
Authors
सौदामिनी गुप्ता, डॉ. शशिकांत मणि त्रिपाठी
Abstract
मानव जीवन की इन ज्वलंत समस्याओं को दूर करने के उपाय का वर्णन भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में बहुत अच्छे प्रकार से किया है। श्रीमद्भगवद्गीता विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक, पवित्रतम एवं योगपरक ग्रंथ है। इसमें विभिन्न प्रकार के योगों की विशद विवेचना की गई है। जिसमें से कर्मयोग, ज्ञानयोग एवं भक्तियोग प्रमुख हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम शिष्य एवं शाश्वत सखा अर्जुन के सभी प्रकार के मानसिक संताप को दूर करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश तब दिया, जब महाभारत युद्ध प्रारम्भ होने के पहले वे दोनों कुरूक्षेत्र में दोनों सेनाओं के मध्य में थे। जीवन में उत्पन्न विभिन्न प्रकार की समस्याओं के कारण मनुष्य कई प्रकार के मानसिक संताप से ग्रस्त हो जाता है। इन मानसिक संतापों को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कई प्रकार के उपाय बताये हैं।
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Pages:25-27
How to cite this article:
सौदामिनी गुप्ता, डॉ. शशिकांत मणि त्रिपाठी "श्रीमद्भागवद्गीता में ज्ञानयोग का स्वरूप". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 9, Issue 4, 2024, Pages 25-27
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