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VOL. 10, ISSUE 1 (2025)
जीवन कौशलों का बीजा रोपणः खेल-खेल में
Authors
रश्मि वर्मा
Abstract
आज की व्यस्ततम जीवन शैली में माता-पिता के पास अपने बच्चों को देने के लिए समय है ही नहीं जितना समय है उसमें आवश्यक जरूरतों पर ही थोड़ा ध्यान दे पाते हैं लेकिन बढ़ती उम्र के साथ जीवन मूल्यों के बीज का रोपण बचपन में ही किया जाना अति आवश्यक है। बचपन और मोबाइल का साथ आज इस महत्वपूर्ण कार्य में बड़ी बाधा बन गया है। अतः ये कार्य अधिक चुनौती पूर्ण हो गया है। कोविड काल के बाद से बच्चों की तार्किक शक्ति, कल्पना शक्ति,अपने मन की इच्छाओं को समझने का भाव, सुनने की क्षमता, कुछ करने की पहल करना जैसे गुणों में बहुत कमी आई है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि देश के भावी नागरिकों का सर्वांगीण विकास हो सके। उनमें जीवन मूल्य विकसित हों ताकि वे सुदृढ़ समाज का अंग बन सके। अपने कार्यों से  निराशा  और हताशा  से घिरे बिना अपना नाम कमा सकें, इसके लिए खेल सबसे उत्तम साधन है। जाने अनजाने ही सही कोविड काल से बच्चों के सीखने की क्षमता में काफी कमी आई है। बौद्धिक स्तर तो है बस उसे प्रेरणा चाहिए। ऐसे में खेल उन्हें आनंदित करते हैं और खुश मन दी जाने वाली शिक्षा को बड़ी गहराई से आत्मसात करता है। एक बार सीखने- सिखाने की प्रक्रिया जहां शुरू हुई उसका लाभ फिर शिक्षण के क्षेत्र में भी दिखने लगता है। बच्चे उत्सुक, जागरूक, चौतन्य होते चले जाते हैं। मन उमंग से भरा रहता है और अधिगम की प्रक्रिया आसान होती जाती है।
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Pages:28-30
How to cite this article:
रश्मि वर्मा "जीवन कौशलों का बीजा रोपणः खेल-खेल में". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 1, 2025, Pages 28-30
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