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VOL. 10, ISSUE 4 (2025)
महान राजा भोज का साहित्य और लेखन में योगदान
Authors
डॉ. प्रतापसिंह राणाजी वेंजिया
Abstract
राजा भोज भारतीय इतिहास के मध्यकालीन काल के ऐसे शासक थे जिन्होंने साहित्य, विज्ञान, कला और संस्कृति के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। ११वीं शताब्दी में परमार वंश के इस शासक ने धारानगरी को विद्यानगरी बनाया और ज्ञान के प्रसार के लिए शिक्षा, पुस्तकालय और कला के विभिन्न क्षेत्रों का संवर्धन किया। उन्होंने लगभग ८४ ग्रंथों की रचना की, जिनमें से प्रमुख हैं: सारस्वत कंठाभरण, शृंगारप्रकाश, समरांगण सूत्रधार, युक्तिकल्पतरु और राजमार्तंड।
इन ग्रंथों में संस्कृत भाषा का शुद्ध प्रयोग, काव्यशास्त्र का विवेचन, आयुर्वेद और चिकित्सा का विवरण, वास्तु और नगर योजना के वैज्ञानिक सिद्धांत और योग एवं नीति का समन्वय स्पष्ट है।  राजा भोज का साहित्यिक योगदान केवल उनके समय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के विद्वानों, कवियों और वैज्ञानिकों को प्रेरित करता रहा। उनका दृष्टिकोण यह दिखाता है कि सच्चा शासक ज्ञान और प्रशासन, कला और विज्ञान का संतुलन बनाए रखता है।

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Pages:36-38
How to cite this article:
डॉ. प्रतापसिंह राणाजी वेंजिया "महान राजा भोज का साहित्य और लेखन में योगदान". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 4, 2025, Pages 36-38
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